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हृदय की एनाटॉमी और फिजियोलॉजी/हृदय के कक्ष

मानव शरीर में हृदय के चार कक्षों को समझना

मानव शरीर में हृदय के चार कक्षों को समझना
Team SH

Team SH

Published on

January 9, 2026

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हृदय हमारे रक्त संचार तंत्र (circulatory system) का इंजन है, और इसके केंद्र में चार कक्ष (chambers) होते हैं। ये कक्ष एक साथ मिलकर शरीर में रक्त का संचार बनाए रखते हैं, जिससे ऑक्सीजन और पोषक तत्व कोशिकाओं तक पहुँचते हैं और अपशिष्ट पदार्थ शरीर से बाहर निकल जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये चारों कक्ष वास्तव में क्या करते हैं और ये इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं?

इस ब्लॉग में हम हृदय के चार कक्षों, दायाँ आलिंद (Right Atrium), दायाँ निलय (Right Ventricle), बाँया आलिंद (Left Atrium) और बाँया निलय (Left Ventricle), की संरचना और कार्य को समझेंगे। ब्लॉग के अंत तक आपको यह स्पष्ट समझ होगी कि ये चारों कक्ष मिलकर आपके जीवन को बनाए रखने में कैसे योगदान देते हैं।

हृदय के चार कक्ष: एक परिचय

आपका हृदय चार मुख्य कक्षों में बँटा होता है:

  1. दायाँ आलिंद (Right Atrium)
  2. दायाँ निलय (Right Ventricle)
  3. बाँया आलिंद (Left Atrium)
  4. बाँया निलय (Left Ventricle)

इन कक्षों को एक पेशीय दीवार, जिसे सेप्टम (Septum) कहा जाता है, अलग करती है। हृदय का दायाँ भाग ऑक्सीजन-रहित रक्त (deoxygenated blood) को ग्रहण करने और फेफड़ों तक भेजने का काम करता है, जबकि बाँया भाग ऑक्सीजन-युक्त रक्त (oxygenated blood) को पूरे शरीर में पंप करता है।

आइए अब प्रत्येक कक्ष की भूमिका को विस्तार से समझते हैं।

हृदय का दायाँ भाग: ऑक्सीजन-रहित रक्त को ग्रहण और पंप करना

हृदय का दायाँ हिस्सा उस रक्त को संभालता है जो पहले ही शरीर में ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुँचा चुका है और अब कार्बन डाइऑक्साइड और अपशिष्ट पदार्थ लेकर वापस आया है। इस रक्त को फेफड़ों में भेजा जाता है ताकि वह पुनः ऑक्सीजन प्राप्त कर सके।

1. दायाँ आलिंद (Right Atrium)

  • कार्य: दायाँ आलिंद शरीर से आने वाले ऑक्सीजन-रहित रक्त को ग्रहण करता है। यह रक्त दो मुख्य नसों से आता है:
  • सुपीरियर वेना कावा (Superior Vena Cava): शरीर के ऊपरी हिस्से से रक्त लाती है।
  • इंफीरियर वेना कावा (Inferior Vena Cava): शरीर के निचले हिस्से से रक्त लाती है।
  • संचार में भूमिका: दायाँ आलिंद एक भंडारण कक्ष की तरह काम करता है, जो रक्त को थोड़ी देर रोककर रखता है और फिर उसे दाएँ निलय में भेज देता है। यह प्रक्रिया डायस्टोल (Diastole) के दौरान होती है, जब हृदय के कक्ष शिथिल होकर रक्त से भरते हैं।

2. दायाँ निलय (Right Ventricle)

  • कार्य: दायाँ निलय ऑक्सीजन-रहित रक्त को फेफड़ों में भेजता है, जहाँ वह ऑक्सीजन ग्रहण करता है और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ता है।
  • संचार में भूमिका: सिस्टोल (Systole) के दौरान, जब हृदय संकुचित होता है, दायाँ निलय रक्त को पल्मोनरी आर्टरी के माध्यम से फेफड़ों तक पंप करता है। फेफड़ों में यह रक्त ऑक्सीजन ग्रहण करता है और फिर हृदय के बाँए हिस्से में लौटता है।

हृदय का बाँया भाग: ऑक्सीजन-युक्त रक्त का संचार

फेफड़ों में ऑक्सीजन प्राप्त करने के बाद रक्त बाँए हिस्से में लौटता है, जहाँ से वह शरीर के सभी अंगों और ऊतकों तक पहुँचाया जाता है।

3. बाँया आलिंद (Left Atrium)

  • कार्य: बाँया आलिंद फेफड़ों से आने वाले ऑक्सीजन-युक्त रक्त को पल्मोनरी वेन्स के माध्यम से ग्रहण करता है।
  • संचार में भूमिका: यह रक्त को थोड़ी देर रोककर रखता है और फिर डायस्टोल के दौरान बाँए निलय में भेज देता है।

4. बाँया निलय (Left Ventricle)

  • कार्य: बाँया निलय हृदय का सबसे शक्तिशाली भाग है। यह ऑक्सीजन-युक्त रक्त को एओर्टा (Aorta) के माध्यम से पूरे शरीर में पंप करता है।
  • संचार में भूमिका: सिस्टोल के दौरान बाँया निलय बलपूर्वक संकुचित होकर रक्त को एओर्टा में भेजता है, जो उसे शरीर के हर हिस्से, मस्तिष्क से लेकर पैर की उँगलियों तक पहुँचाती है।
  • दिलचस्प तथ्य: बाँए निलय की दीवारें दाएँ निलय की तुलना में लगभग तीन गुना मोटी होती हैं क्योंकि इसे पूरे शरीर में रक्त पंप करने के लिए अधिक ताकत लगानी पड़ती है।

चारों कक्ष कैसे मिलकर रक्त प्रवाह को बनाए रखते हैं

चारों कक्ष एक टीम की तरह काम करते हैं ताकि शरीर में रक्त का प्रवाह लगातार बना रहे। यह प्रक्रिया इस प्रकार होती है:

  1. शरीर से ऑक्सीजन-रहित रक्त दाएँ आलिंद में प्रवेश करता है।
  2. दायाँ आलिंद रक्त को दाएँ निलय में भेजता है, जो उसे फेफड़ों में ऑक्सीजन लेने के लिए पंप करता है।
  3. फेफड़ों से ऑक्सीजन-युक्त रक्त बाँए आलिंद में लौटता है।
  4. बाँया आलिंद रक्त को बाँए निलय में भेजता है, जो उसे पूरे शरीर में पंप करता है।

इस प्रक्रिया को कार्डियक साइकिल (Cardiac Cycle) कहा जाता है। एक स्वस्थ वयस्क में यह प्रक्रिया प्रति मिनट लगभग 70 से 100 बार दोहराई जाती है यानी आपका हृदय दिन में लगभग 1,00,000 बार धड़कता है!

मानव शरीर में हृदय के चार कक्षों को समझना


जब हृदय के कक्ष ठीक से काम नहीं करते तो क्या होता है?

यदि हृदय के कक्ष सही ढंग से काम न करें तो गंभीर बीमारियाँ हो सकती हैं। आइए कुछ आम स्थितियों पर नज़र डालते हैं:

1. एट्रियल फिब्रिलेशन (Atrial Fibrillation - AFib)

यह एक स्थिति है जिसमें आलिंद बहुत तेज़ या अनियमित रूप से धड़कते हैं, जिससे रक्त का सामान्य प्रवाह बाधित होता है। इससे रक्त के थक्के (blood clots) बन सकते हैं, जो स्ट्रोक या हृदय विफलता का कारण बन सकते हैं।

  • लक्षण: दिल की धड़कन तेज़ होना, साँस फूलना, चक्कर आना।
  • भारतीय संदर्भ: भारत में हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज़ के मामलों में बढ़ोतरी के कारण AFib के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इंडियन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, लगभग 30% भारतीयों को हाई ब्लड प्रेशर है, जिससे AFib का खतरा बढ़ता है।

2. वेंट्रिकुलर हाइपरट्रॉफी (Ventricular Hypertrophy)

इस स्थिति में निलयों की दीवारें मोटी हो जाती हैं, जो आमतौर पर हाई ब्लड प्रेशर या अन्य हृदय रोगों के कारण होता है। इससे हृदय को रक्त पंप करने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे हृदय विफलता का जोखिम बढ़ता है।

  • लक्षण: सीने में दर्द, थकान, साँस लेने में तकलीफ।
  • वैश्विक आंकड़े: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, लगभग 2.6 करोड़ लोग विश्वभर में हृदय विफलता से प्रभावित हैं और वेंट्रिकुलर हाइपरट्रॉफी इसका प्रमुख कारण है।

3. हृदय वाल्व की समस्याएँ (Heart Valve Problems)

यदि हृदय के वाल्व सही तरीके से खुलते या बंद नहीं होते, तो रक्त प्रवाह प्रभावित होता है। माइट्रल वाल्व प्रोलैप्स या एओर्टिक स्टेनोसिस जैसी स्थितियाँ हृदय की कार्यक्षमता को कम कर सकती हैं।

  • लक्षण: थकान, सीने में दर्द, पैरों में सूजन।
  • वैश्विक आंकड़े: हृदय वाल्व रोगों से विश्वभर में लगभग 1.3 करोड़ लोग प्रभावित हैं। समय पर निदान से इनका प्रबंधन संभव है।

मानव शरीर में हृदय के चार कक्षों को समझना

अपने हृदय के कक्षों को स्वस्थ कैसे रखें

हृदय के चारों कक्षों का स्वास्थ्य बनाए रखना हृदय रोगों से बचाव के लिए बहुत ज़रूरी है। यहाँ कुछ व्यावहारिक सुझाव दिए गए हैं:

  1. रक्तचाप की नियमित निगरानी करें: हाई ब्लड प्रेशर हृदय के कक्षों, खासकर निलयों, के लिए सबसे बड़ा खतरा है। इंडियन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, भारत में लगभग 30% वयस्कों को हाई ब्लड प्रेशर है।
  2. सक्रिय रहें: नियमित व्यायाम हृदय को मजबूत बनाता है और रक्त प्रवाह को बेहतर करता है। वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट मध्यम स्तर के व्यायाम की सलाह देता है।
  3. संतुलित आहार लें: फल, सब्जियाँ और साबुत अनाज से भरपूर आहार हृदय के लिए फायदेमंद होता है। भारतीय पारंपरिक भोजन जैसे दालें, हरी सब्जियाँ और हल्दी कोलेस्ट्रॉल को कम करने और रक्त संचार सुधारने में मदद करती हैं।
  4. धूम्रपान से दूर रहें: धूम्रपान रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुँचाता है और हृदय की पंपिंग क्षमता को घटाता है। धूम्रपान छोड़ने से हृदय रोग का खतरा काफी कम हो जाता है।

निष्कर्ष

हृदय के चार कक्ष - दायाँ आलिंद, दायाँ निलय, बाँया आलिंद और बाँया निलय, शरीर में रक्त के संचार को बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। ये एक साथ मिलकर ऑक्सीजन-रहित रक्त को फेफड़ों तक भेजते हैं और ऑक्सीजन-युक्त रक्त को पूरे शरीर में पहुँचाते हैं।

यदि आप यह समझते हैं कि ये कक्ष कैसे काम करते हैं, तो आप अपने हृदय के महत्व को बेहतर ढंग से महसूस कर सकते हैं।

नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और रक्तचाप का सही नियंत्रण रखकर आप अपने हृदय के कक्षों को स्वस्थ रख सकते हैं और हृदय रोग के खतरे को कम कर सकते हैं।

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